भारत एक ऐसा देश है जहाँ परंपराएँ, संस्कार और आध्यात्मिक मान्यताएँ जीवन के हर चरण में घुली हुई हैं। भारतीय पंचांग में प्रत्येक माह का अपना-अलग धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। इन्हीं महीनों में एक अत्यंत पवित्र और शुभ महीना है—मार्गशीर्ष मास जिसे हिंदी पंचांग के अनुसार वर्ष का नवां महीना माना जाता है। इस मास का विशेष उल्लेख भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्वयं श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय 10, श्लोक 35) में किया गया है, जहाँ वे कहते हैं—
“मासानां मार्गशीर्षोऽहम्।”
अर्थात् महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ।
यह कथन इतना ही काफी है यह सिद्ध करने के लिए कि मार्गशीर्ष मास कितना पवित्र और महत्वपूर्ण है। इस माह को अगहन माह, अग्रयण मास, अग्रहन मास और अगहनी महीना भी कहा जाता है। कृषि और वैदिक परंपरा से जुड़ा यह महीना भक्ति-योग, दान-पुण्य, तीर्थ-स्नान, जप-तप और यज्ञ-हवन के लिए उत्कृष्ट माना जाता है।

मार्गशीर्ष मास क्या है?
मार्गशीर्ष मास हिंदू चंद्र कैलेंडर का वह मास है जो कार्तिक के बाद और पौष से पहले आता है। यह सामान्यतः नवंबर–दिसंबर के समय में पड़ता है।
इस माह का नाम नक्षत्र “मृगशिरा” से रखा गया है, जिसे संस्कृत में मार्गशीर्ष कहा गया है। ज्योतिष के अनुसार इस अवधि में सूर्य वृश्चिक राशि में होते हैं और वातावरण में शीत ऋतु की शुरुआत होती है।
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मार्गशीर्ष माह का ऐतिहासिक और शास्त्रीय महत्व
1. भगवान कृष्ण द्वारा सर्वोत्तम महीना घोषित
भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्पष्ट कहा कि मार्गशीर्ष माह तिथियों में सर्वोत्तम है। इसका अर्थ यह हुआ कि इस महीने में किए गए आध्यात्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
2. वेदों में विशेष महत्व
वेदों में इस माह को सूर्य-उपासना, अग्नि-हवन और यज्ञों का मास कहा गया है। इस महीने किए गए जप-तप, यज्ञ, उपवास और स्नान व्यक्ति के पापों का विनाश करते हैं।
3. कृषि और समृद्धि का महीना
मार्गशीर्ष मास को किसानों का सबसे शुभ समय माना गया है। इस समय फसलों में दाना भरता है और खेतों में हरियाली होती है। इसलिए इसे अन्न-समृद्धि का प्रतीक भी कहा गया है।
मार्गशीर्ष मास के धार्मिक कार्य
इस माह में निम्न कार्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं:
| धार्मिक कार्य | महत्व |
|---|---|
| मोक्ष और पुण्य प्राप्ति | पाप नाश एवं आत्मिक शुद्धि |
| व्रत-उपवास | आध्यात्मिक उन्नति |
| भगवान विष्णु और कृष्ण पूजा | जीवन में समृद्धि एवं सुख |
| गाय-सेवा और दान | सौभाग्य और धन वृद्धि |
| तुलसी पूजा | मन-शांति और रोगनाश |
| गंगा-स्नान | पवित्र फल और पाप नाश |
विशेषकर, तुलसी विवाह और वैकुंठ एकादशी जैसे पर्व इसी मास में आते हैं।
मार्गशीर्ष मास की पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान करें
- साफ कपड़े पहनें
- घर में दीप-दान करें
- तुलसी पर जल और दीप अर्पित करें
- श्रीकृष्ण और विष्णु जी की पूजा करें
- गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम का जप करें
- गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करें
- गौ-सेवा करें
इस मास की प्रमुख व्रत और तिथियाँ
- मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत
- एकादशी व्रत (मोक्षदा और वैकुंठ एकादशी)
- पूर्णिमा पूजा
- संकटा-चतुर्थी
- मासिक शिवरात्रि
- गीता जयंती

Contact usमार्गशीर्ष गुरुवार व्रत का महत्व
मार्गशीर्ष के गुरुवार का व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से आर्थिक संकट समाप्त होता है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
व्रत नियम:
- पीले वस्त्र धारण करें
- पीले फूल और हल्दी-कुमकुम से पूजन
- केले के पौधे की पूजा
- पीले भोजन का प्रसाद
आध्यात्मिक दृष्टि से मार्गशीर्ष का महत्व
- इस माह में ध्यान और भक्ति का फल अत्यधिक मिलता है
- मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और पुण्य की प्राप्ति
- पापों का क्षय और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त
यह महीना मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है, जिसके कारण इसे “साधना मास” कहा जाता है।
वैज्ञानिक और प्राकृतिक महत्व
| कारण | वैज्ञानिक लाभ |
|---|---|
| सूर्य की ऊर्जा में परिवर्तन | रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है |
| शीत ऋतु का आगमन | शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता |
| तुलसी-पूजन | वातावरण शुद्ध होता है |
| सादा भोजन का नियम | बीमारियों से बचाव |
मार्गशीर्ष मास में क्या करें
✓ भजन-कीर्तन
✓ तीर्थ-स्नान
✓ दान-धर्म
✓ हवन-पूजन
✓ गौ-सेवा
✓ फलाहार और सत्विक भोजन
मार्गशीर्ष में क्या न करें
✗ झूठ, क्रोध, अहंकार
✗ नशा और मांसाहार
✗ अपशब्द और स्वार्थ
✗ बिना जरूरत किसी का अपमान
यह माह क्यों देता है विशेष फल?
क्योंकि यह समय आत्मा को शुद्ध करने का होता है। ध्यान, योग, जप, दान और उपवास मन और शरीर को संतुलन देते हैं। इस मास में वातावरण भी सकारात्मक और शांत रहता है।
ज़रूर ✅
नीचे मार्गशीर्ष मास के विशेष, सरल और बेहद शक्तिशाली उपाय दिए जा रहे हैं जिन्हें करने से धन, सौभाग्य, स्वास्थ्य, शांति और आध्यात्मिक लाभ मिलता है। ये उपाय घर में आसानी से कर सकते हैं 👇
✅ मार्गशीर्ष मास के शक्तिशाली उपाय
✨ 1. श्रीकृष्ण के “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें
- रोज़ सुबह 108 बार
- कमल या कुश के आसन पर बैठकर
लाभ: मन की शांति, हर कार्य में सफलता, कष्ट दूर
✨ 2. तुलसी पर दीपक जलाएँ
- शाम को तुलसी माता के सामने सरसों या घी का दीप जलाएँ
- तुलसी पर जल चढ़ाएँ
लाभ: घर में सकारात्मक ऊर्जा, रोग नाश, लक्ष्मी कृपा
✨ 3. मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत
- पीले वस्त्र पहनें
- विष्णु-लक्ष्मी पूजा
- केले के पौधे पर जल चढ़ाएँ
लाभ: धन-वैभव, घर में सुख शांति, दांपत्य जीवन में मधुरता
✨ 4. श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें
- रोज 1 अध्याय या कम से कम 1 श्लोक
- विशेष रूप से गीता जयंती के दिन
लाभ: बुद्धि शुद्ध, निर्णय क्षमता बढ़ती है
✨ 5. गऊ सेवा — 1 रोटी + गुड़
- रोज गाय को गुड़ मिलाकर रोटी दें
- हाथ से खिलाना श्रेष्ठ
लाभ: पितृ दोष शांति, धन, संतान सुख
✨ 6. अनाज और कपड़ा दान
- जरूरतमंदों को भोजन दें
- गर्म कपड़े दान करें
लाभ: पुण्य, पापों का नाश
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मार्गशीर्ष मास वह पवित्र समय है जब भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद पूरे संसार पर बरसता है। यह महीना आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति, दान-पुण्य, साधना और समृद्धि का प्रतीक है। इस मास में किए गए पुण्य कर्म व्यक्ति को अनेक जन्मों के पापों से मुक्त कर मोक्ष का रास्ता दिखाते हैं।
यदि आप अपने जीवन में शांति, सुख, धन-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं, तो इस पवित्र महीने के नियमों और व्रतों को अवश्य अपनाए